मिचियो फुचिडा की कहानी
मैं मिचियो फुचिडा हूँ, और एक समय था जब मेरा नाम हवाई जहाजों और उड़ने के जुनून से जुड़ा था। मेरा जन्म जापान में हुआ था, और जब मैं छोटा था, तो मुझे आसमान में उड़ने वाले बड़े-बड़े हवाई जहाज देखना बहुत पसंद था। वे पंखों वाले पक्षियों की तरह लगते थे, और मैं हमेशा सोचता था कि काश मैं भी उनकी तरह उड़ पाता। मेरी आँखों में सपने थे, और मेरे दिल में पंख थे। मैंने तय किया कि मैं एक पायलट बनूंगा। यह आसान नहीं था, लेकिन मैंने बहुत मेहनत की। मैंने सीखा कि हवाई जहाज कैसे उड़ते हैं, कैसे उन्हें नियंत्रित किया जाता है, और कैसे वे तूफानों से भी लड़ सकते हैं। जब मैंने पहली बार खुद हवाई जहाज उड़ाया, तो वह एक जादुई पल था। मुझे लगा जैसे मैं सचमुच उड़ रहा हूँ, बादलों को छू रहा हूँ और दुनिया को ऊपर से देख रहा हूँ। मेरा दिल उत्साह से भर गया था।
मैंने नौसेना में एक एविएटर के रूप में अपना करियर शुरू किया। यह एक रोमांचक लेकिन खतरनाक जीवन था। हम एक टीम थे, एक परिवार की तरह, एक-दूसरे का सहारा बनते थे। हमने मिलकर बहुत अभ्यास किया, और हर मिशन के लिए खुद को तैयार किया। आसमान हमारा घर था, और हमारा हवाई जहाज हमारा सबसे भरोसेमंद साथी। मुझे उन दिनों की याद है जब हम मिशन पर जाते थे। हर उड़ान एक नई चुनौती थी, और हर मिशन के लिए हमें बहुत ध्यान देना पड़ता था। मैंने पर्ल हार्बर पर हुए हमले में भी हिस्सा लिया था। मैं उन हवाई जहाजों का नेतृत्व कर रहा था जो उस हमले के लिए गए थे। यह एक बहुत ही गंभीर और महत्वपूर्ण क्षण था, और मैं अपने देश के लिए अपनी ड्यूटी कर रहा था। यह सब बहुत तीव्र था, और उड़ने का अनुभव, अपने साथियों के साथ, हमेशा मेरे साथ रहेगा।
जब युद्ध खत्म हुआ, तो मेरी जिंदगी एक नई दिशा में मुड़ गई। युद्ध के बाद, मैंने ईसाई धर्म अपनाया, और यह मेरे जीवन का एक बड़ा बदलाव था। इसने मेरे सोचने के तरीके को बदल दिया। मैंने शांति का महत्व समझा और यह भी कि हमें एक-दूसरे से प्यार करना चाहिए। मुझे लगा कि मुझे अपनी कहानी दुनिया को बतानी चाहिए, ताकि लोग युद्ध के बजाय शांति का रास्ता चुनें। मैंने बोलना शुरू किया, लोगों को बताया कि मैंने क्या देखा और मैंने क्या सीखा। मैं एक वक्ता और उपदेशक बन गया, और मेरा लक्ष्य था लोगों को शांति और प्रेम का संदेश देना। मैं अब भी उड़ने के अपने प्यार को याद करता हूँ, लेकिन अब मेरा सबसे बड़ा जुनून लोगों को यह सिखाना है कि कैसे एक साथ मिलकर एक बेहतर दुनिया बनाई जा सकती है।
Looking back, I see that moment changed my life. My journey from a young boy fascinated by airplanes to a naval aviator, and then to a messenger of peace, shows that even after experiencing the harsh realities of war, a path towards understanding and reconciliation is possible. My life’s work became about sharing my experiences and advocating for a world where such conflicts are avoided.
पढ़ाई की समझ के प्रश्न
उत्तर देखने के लिए क्लिक करें