मार्था ग्राहम: नाचने वाली लड़की
मेरा नाम मार्था है। जब मैं एक छोटी लड़की थी, तो मुझे चीज़ों को हिलते हुए देखना बहुत पसंद था। मुझे हवा में नाचते हुए पत्ते और पानी में बनती लहरें देखना अच्छा लगता था। मेरे पिताजी एक डॉक्टर थे। एक बार उन्होंने मुझसे कहा, 'मार्था, याद रखना, शरीर कभी झूठ नहीं बोलता।' इसका मतलब था कि हम जैसा महसूस करते हैं, हमारा शरीर वैसा ही दिखाता है। अगर हम खुश होते हैं, तो हम उछलते हैं। अगर हम उदास होते हैं, तो हमारे कंधे झुक जाते हैं। मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी और मैंने हमेशा इसे याद रखा।
जब मैं बड़ी हुई, तो मैंने लोगों को नाचते हुए देखा। उनका नाच सुंदर था, लेकिन मुझे लगा कि उसमें सच्ची और बड़ी भावनाएँ नहीं थीं। मैं एक ऐसा नाच बनाना चाहती थी जो डर, खुशी और आश्चर्य जैसी भावनाओं को दिखा सके। इसलिए, मैंने अपना खुद का नाच बनाने का फैसला किया! मैं अपने शरीर को एक मुट्ठी की तरह कस लेती थी और फिर उसे ढीला छोड़ देती थी। यह डर या उत्साह जैसी बड़ी भावनाओं को दिखाने का मेरा तरीका था। मैंने अपना खुद का एक डांस स्कूल और एक ग्रुप भी शुरू किया ताकि मैं अपने नए नाच को दुनिया के साथ साझा कर सकूँ।
मेरे नाच कहानियाँ सुनाते थे। वे बहादुर लोगों और बड़ी यात्राओं के बारे में होते थे। मुझे पूरी दुनिया के लोगों के लिए मंच पर प्रदर्शन करना बहुत पसंद था। मैं बहुत बूढ़ी हो गई और फिर मेरी मृत्यु हो गई, लेकिन मेरा नाच आज भी जीवित है। याद रखना, तुम्हारे पास भी हिलने-डुलने का एक खास तरीका है। तुम्हारा शरीर भी अद्भुत कहानियाँ सुना सकता है, बस तुम्हें उसे सुनना है!
पढ़ाई की समझ के प्रश्न
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